जेब हुई खाली
हम मिडिल क्लास की
कैसे बने दिवाली
घर को सजाऊँ
दीए भी जलाऊँ
कोई मुझे बताए
पटाखे फूँकने को
पैसे कहाँ से लाऊँ
धनतेरस से शुरू होकर
भाई दूज तक रहती
खर्चे की भरमार
कहीं गिफ्ट, कहीं मिठाई
कैसे निभे व्यवहार
भाभी रूठे कभी
कभी रूठे ननद
कैसे दोनों को मनाऊँ
मैं अकेली कैसे
पल में मायके
पल में ससुराल
पहुँच कैसे जाऊँ
आई है दिवाली
सिर्फ बच्चों की
माँ तो थकती है
रसोई में, पूजन में
कैसे मन को समझाऊँ
कैसे त्योहार मनाऊँ
डॉ० वन्दना शर्मा
नई दिल्ली

