प्रिया देवांगन 'प्रियू'
रोशनी
सूर्य क्षितिज के नीचे उतर चुका था। दीपावली की शाम धीरे-धीरे रात में बदल रही थी। हर घर की चौखट पर दीये जगमगा रहे थे। कह…
सूर्य क्षितिज के नीचे उतर चुका था। दीपावली की शाम धीरे-धीरे रात में बदल रही थी। हर घर की चौखट पर दीये जगमगा रहे थे। कह…
ऑफिस में दीपावली का माहौल पूरी तरह जम चुका था। कामकाज लगभग ठप था। कर्मचारी छोटी-छोटी टोलियाँ बनाकर इधर-उधर खड़े गपशप …