कविता शर्मा
लेखन और हम
शब्दों की स्याही से दिल की बात लिखते हैं, काग़ज़ पर हम अपने जज़्बात लिखते हैं। लेखन ही बनता है मन की सच्ची आवाज़, चुप ह…
शब्दों की स्याही से दिल की बात लिखते हैं, काग़ज़ पर हम अपने जज़्बात लिखते हैं। लेखन ही बनता है मन की सच्ची आवाज़, चुप ह…
उठो, अपने पथ को नापो तुम, विपदा आएगी, पर न कांपो तुम, तुम्हारी हिम्मत घबरानी नहीं चाहिए, तुम्हारी शक्ति डगमगानी नहीं चा…
चलना तेरा कर्तव्य मुसाफ़िर, तू कुछ-न-कुछ कर पाएगा। धीरे-धीरे इस विराट धरा पे, तू अपनी राह बनाएगा। पथ के काँटे भी है तेरे…
"क्या लिखा है?" रोमिला देवी के आवाज में एक किस्म की हिचक थी। पत्र के शब्द पढ़ कर रामलाल का चेहरा पीला पड़ चुक…