ललित प्रसाद जोशी
बिन माँगे सब मिल जाएगा
चलना तेरा कर्तव्य मुसाफ़िर, तू कुछ-न-कुछ कर पाएगा। धीरे-धीरे इस विराट धरा पे, तू अपनी राह बनाएगा। पथ के काँटे भी है तेरे…
चलना तेरा कर्तव्य मुसाफ़िर, तू कुछ-न-कुछ कर पाएगा। धीरे-धीरे इस विराट धरा पे, तू अपनी राह बनाएगा। पथ के काँटे भी है तेरे…
"क्या लिखा है?" रोमिला देवी के आवाज में एक किस्म की हिचक थी। पत्र के शब्द पढ़ कर रामलाल का चेहरा पीला पड़ चुक…
मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व रखता हूं जन्म से मृत्यु तक उसके संग चलता हूं पहली बोली में जब नन्हे शिशु के मुख निकलता हू…
बैठे सोच रही हूँ मन में, लिखे भाग्य में क्या भगवान। बीच डगर पितु छोड़ चले हैं, कौन करेगा कन्यादान।। स्वप्न सँजोए कितने…