प्रणव राज
विपदा से कांपो मत
उठो, अपने पथ को नापो तुम, विपदा आएगी, पर न कांपो तुम, तुम्हारी हिम्मत घबरानी नहीं चाहिए, तुम्हारी शक्ति डगमगानी नहीं चा…
उठो, अपने पथ को नापो तुम, विपदा आएगी, पर न कांपो तुम, तुम्हारी हिम्मत घबरानी नहीं चाहिए, तुम्हारी शक्ति डगमगानी नहीं चा…
"क्या लिखा है?" रोमिला देवी के आवाज में एक किस्म की हिचक थी। पत्र के शब्द पढ़ कर रामलाल का चेहरा पीला पड़ चुक…