ललित प्रसाद जोशी
बिन माँगे सब मिल जाएगा
चलना तेरा कर्तव्य मुसाफ़िर, तू कुछ-न-कुछ कर पाएगा। धीरे-धीरे इस विराट धरा पे, तू अपनी राह बनाएगा। पथ के काँटे भी है तेरे…
चलना तेरा कर्तव्य मुसाफ़िर, तू कुछ-न-कुछ कर पाएगा। धीरे-धीरे इस विराट धरा पे, तू अपनी राह बनाएगा। पथ के काँटे भी है तेरे…