व्यग्र पाण्डेय
ईश प्रार्थना
.हे दाता हे मालिक सबके तेरे विरले काम । ईश कोई अल्ला कोई कहता तुझको राम ।। ऊंचे गिरि समतल भूमि कहीं मरुथल रंगीला धरा हर…
.हे दाता हे मालिक सबके तेरे विरले काम । ईश कोई अल्ला कोई कहता तुझको राम ।। ऊंचे गिरि समतल भूमि कहीं मरुथल रंगीला धरा हर…
सावन आया रे सावन आया रे बूंद बरसाता, बिजुरी चमकाता, धरा का अंग अंग सरसाया रे सावन आया रे... नदियां अलसाई हुई थी…