प्रिया देवांगन 'प्रियू'
व्यथा
बैठे सोच रही हूँ मन में, लिखे भाग्य में क्या भगवान। बीच डगर पितु छोड़ चले हैं, कौन करेगा कन्यादान।। स्वप्न सँजोए कितने…
बैठे सोच रही हूँ मन में, लिखे भाग्य में क्या भगवान। बीच डगर पितु छोड़ चले हैं, कौन करेगा कन्यादान।। स्वप्न सँजोए कितने…