.हे दाता हे मालिक सबके तेरे विरले काम ।
ईश कोई अल्ला कोई कहता तुझको राम ।।
ऊंचे गिरि समतल भूमि कहीं मरुथल रंगीला
धरा हरित रंग से शोभित दिखता नभ नीला
रात दिन तेरी ही मंशा ना लेती कभी विराम ।।
तुझमें सब है सबमें तू है तू काल महाकाल
माया के भ्रम का कैसा फैला रखा है जाल
यूं तो तू एक ही है तेरे रखे अनेकों नाम ।।
तू पूजा पाठ में भी तुझको भाये अजान
करके प्रार्थना मन से कृपा पा लेता इंसान
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा सब आस्था के धाम ।।
तेरे नाम पर लड़ रही है आज तेरी संतान
तूने बनायें इंसान और वो बन गये शैतान
दे सद्बुद्धि सबको ये ना करे तुझे बदनाम ।।
- व्यग्र पाण्डे (कवि/लेखक)
ईश कोई अल्ला कोई कहता तुझको राम ।।
ऊंचे गिरि समतल भूमि कहीं मरुथल रंगीला
धरा हरित रंग से शोभित दिखता नभ नीला
रात दिन तेरी ही मंशा ना लेती कभी विराम ।।
तुझमें सब है सबमें तू है तू काल महाकाल
माया के भ्रम का कैसा फैला रखा है जाल
यूं तो तू एक ही है तेरे रखे अनेकों नाम ।।
तू पूजा पाठ में भी तुझको भाये अजान
करके प्रार्थना मन से कृपा पा लेता इंसान
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा सब आस्था के धाम ।।
तेरे नाम पर लड़ रही है आज तेरी संतान
तूने बनायें इंसान और वो बन गये शैतान
दे सद्बुद्धि सबको ये ना करे तुझे बदनाम ।।
- व्यग्र पाण्डे (कवि/लेखक)
कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी (राज.)322201
E-mail: vishwambharvyagra@gmail.com


बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएं