उठो, अपने पथ को नापो तुम,
विपदा आएगी, पर न कांपो तुम,
तुम्हारी हिम्मत घबरानी नहीं चाहिए,
तुम्हारी शक्ति डगमगानी नहीं चाहिए।
तुम उठो और आसमान में छेद कर दो,
तुम जागो और अहंकार को ढेर कर दो,
तुम्हारे अंदर आग अभी बाकी है,
तुम बुझ नहीं सकते, तुम्हारी जीत अभी बाकी है।
जीवन अभी तुम्हे संघर्ष में बितानी है,
धन- दौलत नहीं, तुम्हे खोई इज्जत कमानी है,
मां- बाप का सर झुकने न देना,
स्वयं को त्याग कर भी, उनको कभी कष्ट न देना।
उठो, अपने पथ को नापो तुम,
विपदा आएगी, पर न कांपो तुम,
विफलता से न डरो, वो तो आएगी,
कर्म करो, सफलता तो यूं आएगी।
प्रणव राज
बिहार
